जीवन में संगीत हो तो अस्पताल खाली हो जाएंगे: - नीलम मलिक

 बच्चों को नम्रता से बोलना सिखाना चाहिए: आर्या ग्लोबल नीलम मलिक


संवाददाता/स्वदेश मालवीय

मुंबई.  "हमें स्कूलों में बच्चों को नम्रता से बोलना सिखाना चाहिए है, उन्हें संवेदनशील बनाना है। यदि संगीत हमारे जीवन में होगा, तो समाज मे खालीपन नही होंगे ,अस्पताल खाली रहेंगें लोग बीमार ही नही होंगे और हमारा जीवन खुशियों से भरा होगा" रवींद्र नाट्यमंदिर में स्वरधारा की ओर से आयोजित कार्यक्रम 'सोशल इमोशनल लर्निग' में आर्या ग्लोबल की फाउंडर नीलम मलिक ने अपने विचार रखें।

गुरुवार को दादर में आयोजित नीलम मलिक ने स्वर के महत्व को समझाते हुए कहा कि हम घंटियां क्यों बजाते हैं?, चर्च हो, मंदिर हो या घर हो, घन्टी की आवाजें हमें प्वाजिटिव एनर्जी से भर देती हैं। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हम संगीत, कला और खेल को शिक्षा से अतिरिक्त मानते हैं। 

स्वरधारा ऐप की फाउंडर डाॅ गौरी कवि ने कहा कि मैं संगीत के माध्यम से स्कूलों के बच्चों को संपूर्ण शिक्षा देना चाहती हूं। मेरा उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी (बच्चा) आनंद लेकर आगे बढ़े। गौरी जी ने अपने मधुर गीत से कार्यक्रम में आए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

 

इस कार्यक्रम में बच्चों के संपूर्ण शिक्षा पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान पैनल डिस्कसन में बिल्लाबोग हाई इंटरनेशनल स्कूल ठाणे की प्रिंसिपल, कल्याणी चौधरी, कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल की डायरेक्टर व प्रिंसिपल डॉ रेशमा हेगड़े, आत्मन एकेडमी के फाउंडर डायरेक्टर मंजुश्री पाटिल और अवंती एड्यूटेक के फाउंडर सीईओ अमोल मिरजगांवकर ने बच्चों के संपूर्ण विकास पर व्यापक प्रकाश डाला। 

रेशमा हेगड़े ने कहा कि " मैं अपने बच्चों को लर्नर्स की तरह देखती हूं, हम डांस, म्यूजिक थेरेपी से बच्चों को पढ़ाते हैं। सबसे बड़ी बात है कि बच्चे आपके साथ कितने कंफर्टेबल हैं। वे कैसे अपने इमोशन को आपसे व्यक्त करते हैं। 

मिरजगांवकर जी ने कहा कि मैं बचपन में मौका मिलते ही गाना गाता था, एसटी बस और लोकल ट्रेन में यात्रा बहुत कठिन होती है, लेकिन बच्चे गाना गाते हुए आते जाते हैं, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि अगर हमारे जीवन में म्यूजिक आ जाए, तो हमारा जीवन बहुत सरल हो जाएगा। म्यूजिक बच्चों को जोड़ने, उनके जीवन को बड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

डाॅ मंजुश्री पाटिल ने कहा कि हमें इस बात पर फोकस करना होगा कि बच्चा क्या करना चाहता है। हमें बच्चों को सही चुनना का तरीका सिखाना होगा। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है जर्नी। महत्वपूर्ण यह है कि हमारी यात्रा कैसी रहें। हम कहां पहुंचे यह महत्वपूर्ण नहीं है।

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